रविवार, 31 मार्च 2013

गुमनाम दिन!



      आजकल दिन गुमनाम से हो चले हैँ
      अन्धकार मेँ शुरू होकर
      अन्धकार मेँ ही मिट जाते हैँ |


    शायद कभी ऐसा न रहा हो

2 टिप्‍पणियां:

  1. .भावात्मक अभिव्यक्ति ह्रदय को छू गयी आभार जया प्रदा भारतीय राजनीति में वीरांगना .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-1

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  2. सच है, कभी कभी ऐसा ही खोना हमारे जीवन में भी आ जाता है।

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