बुधवार, 7 जनवरी 2009

क्या हमारा राष्ट्रीय ध्वज साम्प्रदायिक है?


यह सवाल हमारे मन में उठा एक कम्युनिस्ट विचारधारा के समर्थक मित्र के एक कथन से
हमारे एक मित्र ने उन्हें सुझाव दिया कि एक जगह पर राष्ट्रीय ध्वज के रंगों का प्रयोग किया जाय उन्हें इस बात पर आपत्ति थी उनका कहना हुआ कि राष्ट्रीय ध्वज में भगवा रंग उन्हें नही पसंद है इससे साम्प्रदायिकता की झलक मिलती है यह सोच हमें अचंभित कर गई
हम इस बात के पक्ष में नही रहते कि किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रीय चिन्हों का सम्मान करना जरूरी है देशभक्त होने के लिए हमारा मानना है कि देशभक्ति राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान पर निर्भर नही करती बल्कि यह तो व्यक्ति की सोच पर निर्भर करती है राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान और उनके प्रति प्रेम दिखने वाले कई लोग अपने कृत्यों से वस्तुतः राष्ट्रविरोधी होते हैं और इन बातों को महत्त्व देने वाले कई लोग अपने कृत्यों से राष्ट्रभक्त होते हैं
हमें उन मित्र की राष्ट्रीय ध्वज सम्बन्धी सोच पर ऐतराज होता अगर उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को साम्प्रदायिक बताने की अपनी सोच के पीछे कारण सिर्फ़ उसमे भगवा रंग का होना बताया होता तब ये सिर्फ़ उनकी सोच होती जो किसी के लिए सही और किसी के लिए ग़लत होती अगर वो भगवे के साथ हरे रंग का भी जिक्र कर देते
अगर भगवा रंग साम्प्रदायिकता की झलक है तो हरा रंग इससे अछूता कैसे है? यह सिर्फ़ अंध हिंदू विरोध का प्रमाण है कि उन्होंने सिर्फ़ भगवा रंग का जिक्र किया सच तो यह है कि अगर कट्टरपंथी हिंदू धर्म में हैं तो और धर्मों में भी हैं जितनी आलोचना हिंदू कट्टरपंथियों की होनी चाहिए उतनी ही और मजहबों के कट्टरपंथियों की भी इस तरह की एकतरफा सोच रखने वाले कट्टरपंथियों से भी अधिक भ्रमित होते हैं और निंदनीय होते हैं
वस्तुतः हिन्दी में भगवा और केसरिया अलग अलग अर्थों के लिए प्रयोग किए जाते हैं भगवा रंग जहाँ सांप्रदायिक अर्थों के लिए प्रयोग किया जाता है वहीँ केसरिया बलिदानी भावना के लिए प्रयोग किया जाता है और हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रंगों के लिए केसरिया ही प्रयोग में आता है केसरिया और भगवे में कोई अन्तर रंग का होता है या नही हमें नही पता पर भावनाओं का अन्तर जरूर होता है और इस अर्थ में हरा रंग ज्यादा सांप्रदायिक हो सकता है उन लोगों के लिए जो रंगों को साम्प्रदायिकता से जोड़ते हैं
बहरहाल ऐसी सोचें राष्ट्रीय ध्वज के विकास की प्रक्रिया की जानकारी के अभाव के चलते होती है या फ़िर किसी एकमानसिकता में इतना रंग जाने पर कि और रंग दिखाई ही पड़ें

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