सोमवार, 19 जुलाई 2010

बारिश, बारिश पानी पानी

मौसम एक ऐसा विषय है जो बातचीत में अक्सर सप्लीमेंट का काम करता रहता है। मसलन आप किसी से मिलते हैं जिससे बात करने के लिए आप के पास ज्यादा कुछ नहीं है तो झट से मौसम के ऊपर एक छोटी सी परिचर्चा आयोजित करवा सकते हैं। ऐसा ही विषय राजनीति भी माना जाता रहा है पर पिछले कुछ महीनो से हमें राजनीति की लोकप्रियता में गिरावट देखने को मिल रही है । हो सकता है यह गिरावट सिर्फ हमें ही नजर आ रही हो पर कुछ तो है।
खैर हम मौसम पर थे। तो मान लीजिये आपको कोई मिला जिससे बात क्या करें आपको समझ में नहीं आ रहा हैतो आप क्या करते हैं ज्यादातर लोग बात की शुरुआत आज बहुत गर्मी है या इस बार बारिश लेट हो रही है से शुरू करते हैं। ऐसा नहीं है कि लोग इस बार गर्मी कम है या इस बार बारिश अच्छी हो रही है नहीं कह सकते लेकिन परेशानी तो यह है कि गर्मी बढती जा रही है और बारिश कम होती जा रही है। हर साल यही होता आ रहा है या तो बारिश कम होती है या फिर होती है तो ऐसी कि सबकुछ तहस नहस कर देने वाली । जैसे कि पिछले ही कुछ दिनों से चीन के कई हिस्सों में हो रही है । आपको याद होगी चीन की ओलम्पिक उदघाटन समारोह में बारिश रोक देने वाली शानदार कहानी
हमें याद आती है एक उपन्यास की नाम था "सामर्थ्य और सीमा "
बारिश या तो कम हो रही है या बहुत ज्यादा
या तो सूखा आता है या फिर बाढ़
अभी कुछ दिन पहले किसी ने हमसे क्योटो प्रोटोकाल के बारे में पूछा था हम उसे समझा रहे थे और खुद सोचते जा रहे थे कि हम क्यों नहीं समझ रहे हैं सीधी सी बात
हमें नहीं समझ में आ रहा है कि हम खुद से ही हारते जा रहे हैं । हमें अंत नजर आ रहा है और हम उसकी ओर बेफिक्री से बढ़ते जा रहे हैं।
तो अगर आपके पास बात करने के लिए कुछ नहीं है तो मौसम पर परिचर्चा कर लीजिये। वैसे तो हम सब बहुत बिज़ी हैं
खैर आज हम छुट्टी पर हैं(खाली हैं कुछ करने को नहीं है तभी मौसम नजर आ रहा है ) और लखनऊ में सुन्दर बारिश हो रही है।
दो साल पहले जब भारी बारिश हुई थी तो कुकरैल नाले (शहर में बहने वाला एक नाला )में आई बाढ़ में उसके किनारे बसी (अवैध या वैध पता नहीं )अकबर नगर कालोनी डूब गयी थी।इस बार नाले के किनारे किनारे डॉ आंबेडकर पथ का निर्माण हो रहा है तो नाले की एक तरफ सीमा ढंग से बाँध दी गयी है । दूसरी तरफ पड़ता है अकबर नगर । अगर ज़रा सी भी ठीक बारिश हुई तो अकबर नगर डूबना तय होगा । उम्मीद है वहां के वाशिंदों ने तैयारी कर रखी होगी। अगर सरकार डॉ आंबेडकर पथ बनाने के साथ साथ नाले के प्रवाह का भी ढंग से इंतजाम करती चलती तो डॉ आंबेडकर बुरा नहीं मानते न ही पहचान से जुड़ा कोई संकट खडा होता। राहत की बात है कि निकाय चुनाव नजदीक हैं अगर बाढ़ आई तो निकाय प्रत्याशी कुछ जनसेवा कर लेंगे ।

राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम के अंतर्गत गावों में जलाशयों का निर्माण हुआ है जिसमें वर्ष जल संचयन का विचार होगा दूर से देख कर तो लगता है कि अच्छा विचार है कभी पास से देखने का मौक़ा मिला तो पता चलेगा कि कितने कारगर जलाशय होंगे ।
अंततः एक बात जिस बच्चे को हम क्योटो प्रोटोकाल के बारे में बता रहे थे उसने एक सवाल पूछा
अमेरिका जिसकी सबसे ज्यादा जिम्मेदारी बनती थी ग्रीन हाउस गैसों में कमी की वही क्यों पीछे हटा ?
जवाब सीधा है पर फिर भी खटकता है ।
सरकार पीछे हट गई तो क्या महान अमेरिका के नागरिक भी नहीं सोचते कुछ
"एक असुविधाजनक सच" जैसी बाते ही होती रहेंगी या कुछ और भी होगा
नोबल पुरस्कार अंतिम सच है क्या कोई काम हाथ में लेने का

7 टिप्‍पणियां:

  1. 80 प्रतिशत बार बातचीत प्रारम्भ करने के लिये मौसम का सहारा लिया जाता है।

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  2. Ek baat batao...aisa phone number kyun dete ho jise switched off karke rakhte ho? :-(

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  3. आज दिनांक 24 जुलाई 2010 के दैनिक जनसत्‍ता में संपादकीय पेज 6 पर समांतर स्‍तंभ में आपकी यह पोस्‍ट पानी पानी बारिश शीर्षक से प्रकाशित हुई है, बधाई। स्‍कैनबिम्‍ब देखने के लिए जनसत्‍ता पर क्लिक कर सकते हैं। कोई कठिनाई आने पर मुझसे संपर्क कर लें।

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  4. आपका लेख जनसत्ता के आज के संस्करण में प्रकाशित हुआ है.

    http://jansattaraipur.com

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  5. रायपुर संस्करण के प्रष्ट no. 4 पर ऑनलाइन देख सकते हो.

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  6. ब्लॉगजगत में पहली बार एक ऐसा "साझा मंच" जो हिन्दुओ को निष्ठापूर्वक अपने धर्म को पालन करने की प्रेरणा देता है. बाबर और लादेन के समर्थक मुसलमानों का बहिष्कार करता है, धर्मनिरपेक्ष {कायर } हिन्दुओ के अन्दर मर चुके हिंदुत्व को आवाज़ देकर जगाना चाहता है. जो भगवान राम का आदर्श मानता है तो श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र भी उठा सकता है.
    इस ब्लॉग के लेखक बनने के लिए. हमें इ-मेल करें.
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