सोमवार, 10 मई 2010

ब्लोगिंग में वापसी की कोशिश!

जब हमने अपनी पिछली पोस्ट डिजिटली बी पी एल होने की व्यथा लिखी तो तो अंदाजा नहीं था कि अगली पोस्ट के लिए यह बी पी एल होना इतना इंतज़ार करायेगा। हमने पिछली पोस्ट १३ नवम्बर को लिखी थी और तब से अब आज जा के लिखने का मौक़ा मिल पा रहा है।
डिजिटली बी पी एल होना मतलब एक ऐसी जगह पर रहना जहां इन्टरनेट का कनेक्शन मिल पाना कठिन हो जाय। हम रिलायंस का डाटा कार्ड इस्तेमाल करते हैं जो कि जिस जगह पर हम रह रहे हैं वहां इतनी थकी हुई चाल से चलता है कि रोना आ जाय उसपर ट्रांसलिटरेशन का दर्द ! इतनी थकी चाल में तो ऑनलाइन ट्रांसलिटरेशन संभव ही नहीं हो पाता। कई बार कोशिश की कि ऑफलाइन ट्रांसलिटरेशन का इस्तेमाल करके लिखें और फिर ब्लॉगर पर पेस्ट कर दें तो लिख कर रखा और ब्लॉगर खोलने कि असफल कोशिशें करते रहे और थक के ये तरीका भी छोड़ दिया।
अगला प्रयास था ऑफलाइन ट्रांसलिटरेशन के जरिये लिखें और फिर उसे ई मेल के जरिये भेजें । ऐसा करने में फोंट साइज क्या रहेगी और पब्लिश होने के बाद पोस्ट पढने में आएगी भी या नहीं इस बात की दिक्कत थी । खैर कोशिश की! पर मामला जमा नहीं ।
पिछले साल जब हमने मोबाइल रहते हुए कनेक्टिविटी की समस्या का हल खोजने की कोशिश में अपने ब्लॉग पर ये पोस्ट लिखी थी तो रवि रतलामी जी ने ई वी डी ओ का विकल्प सुझाया था। ये विकल्प काफी आकर्षक था पर पहले थो लखनऊ में ई वी डी ओ शुरू नहीं हुआ था , जब शुरू हुआ तो शहर के अन्दर ही काम कर रहा है बाहर नहीं ।
तिलहर कस्बा, जहाँ हम रह रहे हैं शाहजहांपुर जिला मुख्यालय से मात्र २४
किमी की दूरी पर है पर शाहजहांपुर में बी एस एन एल की थ्री जी सेवा का वहाँ तक कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है।
खैर ! ब्लॉग लिखने में परेशानी है पर मोबाइल पर ब्लॉग तो पढ़े ही जा सकते हैं । पढने में ट्रांसलिटरेशन बाधा नहीं है , हाँ टिप्पणी देने में फिर बाधा आती है तो फिर हमने टिप्पणी देना भी छोड़ दिया।
देखते हैं इस समस्या का हल कब तक मिल पाता है और कब हम मनमाफिक तरीके ब्लोगिंग फिर से शुरू कर पाते हैं
आपके पास कोई सुझाव हो तो जरूर बताईयेगा
इस बीच में ब्लॉग जगत से बिना बताये गायब रहने के बावजूद हमें याद रखने के लिए चिट्ठाचर्चा और प्रवीण जी को धन्यवाद (बिना कुछ लिखे चिट्ठाचर्चा में जगह! , काश साल में जन्मदिन कई बार आते । वैसे हम दो बार मनाते हैं)
वैसे चिट्ठाचर्चा से एक शिकायत भी है इसका हालिया टेम्पलेट धीमे कनेक्शन पर खुलने में बड़ी देर लेता है । मोबाइल पर साइड बार तो दीखते ही नहीं कि क्या है उनमें । खैर !

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