बुधवार, 11 जनवरी 2012

हताशा के भाजपा के अनुभव



लगता है भाजपा पर चुनावी बुखार इस कदर चढ़ गया है की वह यह समझ पाने में सक्षम नहीं रह गयी है की किस मुद्दे पर कैसे हमला बोलना है .
आज खबर आई है कि भाजपा के मुखपत्र कमल - सन्देश में राहुल गांधी पर हमला बोला गया है. और मुद्दे तो ठीक हैं पर उसमे राहुल गांधी को शादी न होने की वजह से हताश बताने पर समझ में नहीं आया कि यह भाजपा राहुल पर हमला बोल रही थी कि अपना दर्द बयान कर रही थी. गौरतलब है कि भाजपा में कुंवारे नेताओं की संख्या सर्वाधिक है . अटल विहारी वाजपेयी लम्बे समय तक भाजपा के शीर्ष पर रहे और उनके नाम पर भाजपा आज भी गौरवान्वित होने का दावा करती है. उत्तर प्रदेश चुनावों में भाजपा की प्रचार की कमान संभाल रही उमा भारती से लेकर देश के हर हिस्से में कुंवारे नेताओं की संख्या और दलों की अपेक्षा ज्यादा है . ऐसे में यह समझ में आने में कठिनाई हो रही है कि भाजपा अटल और उमा जैसे नेताओं की हताशा जानने के अपने अनुभव के चलते ऐसा कह रही है या फिर संघ के अविवाहित प्रचारकों की अपनी पार्टी में अनावश्यक दखलंदाजी से उपजी चिढ के चलते यह सोचने पर मजबूर हुई है कि अविवाहित लोगों में हताशा अधिक होती है . कुछ भी हो पर भाजपा को अपने अविवाहित सदस्यों के चलते इस हताशा से उबरने और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के तौर तरीके पता होंगे . अच्छा होता कि राहुल के दुःख के कारण की खोज के साथ उसके निवारण के लिए अटल विहारी वाजपेयी के निजी अनुभव भी बांट दिए जाते .
वैसे गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के चुनावों में चारों प्रमुख दलों में से तीन दलों के शीर्ष प्रचारक अविवाहित ही हैं . भाजपा के ये अनुभव सबके काम आ जाते तो बेहतर होता .
खैर!
वैसे भाजपा की खुद पर हमला करने की आदत इन दिनों काफी बढ़ गयी है. बाबू सिंह कुशवाहा नामक खोज जो आडवानी जी ने अपनी भ्रष्टाचार विरोधी यात्रा की परिणाम स्वरुप प्राप्त की तो सभी को पता है . भाजपा प्रवक्ता ने स्पष्ट कर दिया कि भाजपा  भ्रष्टाचार में निरुद्ध सभी नेताओं के लिए गंगा बनने  की ओर अग्रसर है . हमें लगता है कि नकवी के इस बयान के बाद राजा और कलमाड़ी काफी हल्का महसूस कर रहे होंगे . आखिर कोई तो है जो उनके बारे में सोच रहा है .
वैसे ऐसा भी कहा जा रहा है कि इन चुनावों में भाजपा और बसपा में कुछ समझौता हो गया है . भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे जिस भी नेता को बसपा निकालेगी उसे भाजपा अपने साथ ले लेगी जिससे लोग बसपा पर हमला छोड़ कर भाजपा पर हमला करने लगेंगे . जिससे बसपा विरोधों  से बच जायेगी 
भाजपा का सेन्स ऑफ़ ह्यूमर गजब का है वह लोकायुक्त की आठ सालों से नियुक्ति पर रोक और सशक्त लोकपाल के लिए जबानी संघर्ष दोनों एक साथ कर सकती है .
 उम्मीद है कि यह सेन्स ऑफ़ ह्यूमर चुनावों के बाद भी जारी रहेगा


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