सोमवार, 8 दिसंबर 2008

चुनावी परिणाम

मतदाताओं के नब्ज की समझ कर पाना वास्तव में कठिन होता जा रहा है । प्राप्त रुझान और नतीजे बताते हैं कि पाँच राज्यों के मतदाताओं में सरकार विरोधी सोच कम ही थी । तभी तो जनता ने दिल्ली , छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में निवर्तमान सरकार को दुबारा मौका दिया है जबकि राजस्थान में परिवर्तन को वोट दिया है। वस्तुतः पहली तीन सरकारें अपने काम-काज को अधिक प्रचारित कर रही थी जबकि राजस्थान में मुख्यमंत्री लगातार केन्द्र सरकार पर प्रहार करती नजर आ रहीं थी। जनता ने अपनी बात करने वालों पर ज्यादा भरोसा किया है।
दिल्ली में प्रो विजय कुमार मल्होत्रा नगर निगम चुनावों के नतीजों और मंहगाई के भरोसे दिल्ली विजय को ले कर आश्वस्त थे और उन्होंने मुख्यमंत्री जैसा व्यवहार भी करना शुरू कर दिया था । 26 नवम्बर के मुंबई हमले के बाद भाजपा नेता अन्दर ही अन्दर अधिक आश्वस्त नजर आने लग गए थे । उनकी उम्मीद अधिक मतदान से बढ़ भी गई थी।
पर मतदाताओं ने इस सोच को चकमा देते हुए शीला दीक्षित को एक बार फ़िर मौका देने का निश्चय कर लिया। चुनाव आयोग के ताजा आंकडों के अनुसार कांग्रेस 7 सीटें जीत चुकी है और 31 पर आगे चल रही है जबकि भाजपा १ जीतकर 23 पर आगे है। अन्य के खाते में अभी तक ७ सीटें हैं । ७० सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए ३६ सीटों की आवश्यकता है
मध्यप्रदेश में मतदाताओं ने कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई को नकारते हुए शिवराज सिंह में पुनः भरोसा जताया है । अभी तक प्राप्त रुझानों में भाजपा १२६, कांग्रेस ७७, बसपा १० और उमा भरती की लोजश ६ सीटों पर आगे है । यहाँ कुल सीटें २३० हैं इस हिसाब से भाजपा बहुमत का आंकडा पार कर चुकी है
छतीसगढ़ में भाजपा के रमन सिंह की छवि उनका साथ देते हुए नजर आ रही है। ९० सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ४३ सीटों पर आगे चल रही है जबकि कांग्रेस २९ पर।
राज्यों के उलट राजस्थान ने परिवर्तन को चुना है। वसुंधरा राजे का आतंकवाद पर केंद्रित संदेश भी लोगों को खुश न कर सका यहाँ ९५ सितो पर बढ़त के साथ कांग्रेस बहुमत के लिए आवश्यक १०१ के करीब है । भाजपा को ७३ और बसपा को ७ सीटों पर बढ़त है।
मिजोरम में कांग्रेस को अभी तक प्राप्त २६ रुझानों में से २२ पर बढ़त है और यह बहुमत के लिए जरूरी २१ से ज्यादा है ।
ताजा नतीजे और रुझान
दिल्ली
कुल सीटें - 70
चुनाव हुए - 69
कांग्रेस - 42
भाजपा - 23
अन्य - 04


राजस्थान
कुल सीटें - 200
चुनाव हुए - 200
कांग्रेस- 96
भाजपा - 78
अन्य - 26



मध्य प्रदेश
कुल सीटें - 230
चुनाव हुए - 230
भाजपा- 136
कांग्रेस - 66
अन्य - 28


छत्तीसगढ़
कुल सीटें- 90
चुनाव हुए- 90
भाजपा- 47
कांग्रेस- 38
अन्य- 05

मिजोरम
कुल सीटें- 40
चुनाव हुए- 40
कांग्रेस- 28
एम् एन ऍफ़ - 3
अन्य- 3

7 टिप्‍पणियां:

  1. राजस्थान में शायद आरक्षण का जो मामला वसुंधराजी के कार्यकाल में उठा था वह कुछ हद तक इस हार का ज़िम्मेदार हो सकता है।

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  2. वसुन्धरा जी को गुर्जर वोट भी नहीं मिले और मीणा भी नहीं… इसलिये यह हालत हो गई, बाकी राज्यों में "काम करने वाले" को जनता ने जिताया है, यह राजस्थान का दुर्भाग्य है कि अब वह भी उत्तरप्रदेश की तरह जातिवादी राजनीति में फ़ँसता जा रहा है, गेहलोत के सामने भी रास्ता कोई आसान नहीं है… वह भी दो पाटों में पिसेंगे…

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  3. आपकी बात सही है सुरेश जी कि राजस्थान भी जातिवाद में फंस रहा है
    पर कई दोस्तों ने जो राजस्थान में हैं उन्होंने बताया था कि वसुंधरा जी की शैली भी काफ़ी लोगों को नागवार लग रही थी

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  4. BJP could not judge mood of people in delhi. Its betting on terror made people feel that this party is only after getting gains from such activities

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  5. बी जे पी को अब भी नही होश आएगा कि उसकी राजनीती को दिशा चाहिए
    दिल्ली तो वो जीत सकते थे लेकिन उनके बस का नही है चीजें भुनाना

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  6. इन चुनावों ने साफ़ कर दिया कि अब वोट उसी को मिलेगा जो काम करेगा

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