बुधवार, 22 अक्तूबर 2008

चुपके से


अंधेरी रात के
गहरे सन्नाटे में
चुपके से
धीरे धीरे
मेरे क़रीब आकर
किसी ने
मुझसे कुछ कहा!

मैं सहमी
अलसायी
नींद में उलझी,
पूछ बैठी
कौन है?

कोई जवाब नहीं
ना कोई पद चिन्ह
ना कोई परछाई
फिर भी
छोड़ गया
एक निःशब्द सवाल!

मैं कौन हूँ?
मेरा वज़ूद क्या है!


Reference - Turning the wheel

Follow by Email