बुधवार, 11 फ़रवरी 2009

डंडा और झंडा

लखनऊ में एक राजनैतिक दल का लोकसभा प्रत्याशी काफ़ी दिनों से जम के प्रचार में जुटा हुआ है । उसके झंडे और बैनर देख कर महीनो से लग रहा है कि लोकसभा चुनाव हफ्ते भर में ही है। पता नही इस तरह पानी की तरह बहाए जा रहे पैसे को चुनाव आयोग उम्मीदवार के चुनाव खर्च में मानेगा या नही । सोचने वाली बात यह है जो चुनाव के एक साल पहले से चुनावी तौर तरीके से प्रचार में पैसा बहा रहा है उसने वो पैसा कमाया कैसे होगा ।
खैर!
दो दिन पहले हम सब्जी खरीद रहे थे तो हमने पाया कि पूरी सब्जी मण्डी में उसी प्रत्याशी के झंडे और बैनर हुए हैं।
हमने सब्जी वाले से पूछा कि बहुत बैनर लगा रखे हैं भाई! तो उसने बताया कि पार्टी वाले दे गए थे तो लगाना मजबूरी है । हमने पूछा कि ऐसी क्या मजबूरी है । तो पास वाले सब्जी वाले ने कहा कि जिसके हाथ में पुलिस है उसके बैनर लगना मजबूरी ही है भैया।
ऐसे चल रहा है उन महोदय का प्रचार
आख़िर डंडे के सहारे ही लगता है झंडा !

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