रविवार, 22 मार्च 2009

कमी

उगता हुआ सूरज,
ठंडी हवाएं,
घने पेड़ों की छाँव,
जादुई चाँदनी रातें,
कुहरे से ढके रास्ते,
बारिशों में भीगते दिन,
सरसों, अमलताश
और पलाश के फूल!

सबकुछ तो वही है !

फ़िर क्यों नही लगता
कुछ भी वैसा
जैसा लगता था तुम्हारे साथ !

8 टिप्‍पणियां:

  1. kuch kami rah gai kahi kuch adura sa rah jisko plz pura kare kuki suruat to aap ne ki jaise luga barsat hone wali hai but wo to adhuri hi rah gai

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  2. इसीलिए कविता भी अधूरी सी है क्या

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  3. अमलताश और पलाश - जाने क्यों यह मौसम मन में सदा रहता है!

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  4. फ़िर क्यों नही लगता
    कुछ भी वैसा
    जैसा लगता था तुम्हारे साथ .....
    क्योंकि समय चक्र घूम गया है .

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  5. kuch kam roshan hai roshni
    kuch kam geeli hain barishein
    tham sa gaya hai yeh waqt aise
    tere liye hi thehra ho jaise......

    milte julte bhaav hain..par UNIVERSAL se hain...!

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