रविवार, 22 मार्च 2009

कमी

उगता हुआ सूरज,
ठंडी हवाएं,
घने पेड़ों की छाँव,
जादुई चाँदनी रातें,
कुहरे से ढके रास्ते,
बारिशों में भीगते दिन,
सरसों, अमलताश
और पलाश के फूल!

सबकुछ तो वही है !

फ़िर क्यों नही लगता
कुछ भी वैसा
जैसा लगता था तुम्हारे साथ !

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